Bihar And Orissa Public Demand Recovery Act 1914 Pdf In Hindi -

प्रमाणपत्र अधिकारी ने रामू की बात सुनी और साक्ष्य (Evidence) देखे। के तहत सुनवाई के बाद अधिकारी ने पाया कि रामू का दावा सही था और बकाया राशि को थोड़ा कम कर दिया। अब रामू को संशोधित राशि जमा करनी थी।

उस समय बिहार और उड़ीसा के किसान और जमींदार अक्सर सरकारी बकाया (मालगुजारी, लगान आदि) का भुगतान नहीं कर पाते थे या करने से इनकार कर देते थे। पूर्व में बंगाल प्रेसीडेंसी में 'बंगाल लोक मांग पुनर्प्राप्ति अधिनियम, 1895' (Bengal Public Demands Recovery Act, 1895) लागू था। लेकिन नए प्रांत बिहार और उड़ीसा की भौगोलिक और सामाजिक स्थितियां बंगाल से भिन्न थीं। 1895' (Bengal Public Demands Recovery Act

बकायेदार पर नोटिस की तामील, जिसके बाद बकायेदार अपनी संपत्ति को ट्रांसफर नहीं कर सकता। 1895' (Bengal Public Demands Recovery Act

यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि यह 1914 का अधिनियम वर्तमान में किन राज्यों में लागू है, क्योंकि राज्यों के पुनर्गठन के बाद इसमें कई बदलाव हुए हैं: 1895' (Bengal Public Demands Recovery Act

इस कानून का उद्देश्य है सरकारी जमीन और राजस्व की वसूली करना और विकास कार्यों को बढ़ावा देना। यह कानून बिहार और ओडिशा में बहुत महत्वपूर्ण है और इसका उपयोग सरकारी जमीन और राजस्व की वसूली के लिए किया जाता है।

सर्टिफिकेट दाखिल होने के बाद, धारा 7 के तहत बकायेदार (Certificate Debtor) को एक नोटिस भेजा जाता है। इस नोटिस के साथ सर्टिफिकेट की एक प्रति भी संलग्न होती है। इस नोटिस का उद्देश्य बकायेदार को सूचित करना होता है कि उसके खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

यदि निर्धारित समय में भुगतान या आपत्ति नहीं की जाती, तो वसूली निम्नलिखित तरीकों से की जा सकती है: