सतही तौर पर देखने पर 'सलो' एक अत्यधिक हिंसक और घृणास्पद फिल्म लग सकती है, लेकिन निर्देशक पियर पाओलो पासोलिनी का उद्देश्य केवल दर्शकों को झटका देना (Shock Value) नहीं था। वे एक मार्क्सवादी और फासीवाद-विरोधी विचारक थे। उनके अनुसार, यह फिल्म निम्नलिखित गंभीर विषयों पर एक गहरा प्रहार है:
: फिल्म यह दिखाती है कि जब किसी व्यक्ति या व्यवस्था के पास असीमित और अनियंत्रित शक्ति आ जाती है, तो वह आम जनता को केवल उपभोग और विनाश की वस्तु समझने लगती है। salo or the 120 days of sodom movie in hindi
फिल्म का ऐतिहासिक संदर्भ और आधार उपन्यास पर आधारित: यह फिल्म मार्क्विस डी साडे salo or the 120 days of sodom movie in hindi
(नरक का प्रवेश द्वार) salo or the 120 days of sodom movie in hindi